मैं और उनकी तन्हाई

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Saturday, October 12, 2013

नया हमला हुआ हैं मेरे देश पे, 'फैलि‍न' नाम के तूफान का,


                     नया हमला हुआ हैं मेरे देश पे,
                    'फैलि‍न' नाम के तूफान का,
                     दिल असंकाओ से भरा हुआ है,
                     की क्या होगा वाहा पे इंसान का,
                     हलकान हो रहा है दि‍ल मगर
                     कुछ नहीं होगा, खुद से ये कहता हूँ,
                     क्यूंकी,
                     हमारी सेना के जवान फिर,
                     दो दो हाथ करने को है तैयार,
                     इस नये मेहमान से,
                     करेंगे हिन्दुस्तान की रक्षा अब तूफान से|

6 comments:

  1. यही आस तो निश्चिन्त रखे है देश को वरना नेताओं ने कबका डुबो दिया होता।

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  2. अनूठी रचना, मंगलकानाएं !!

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  3. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (31-03-2014) को ''बोलते शब्द'' (चर्चा मंच-1568) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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